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एक आवाज़ पुकारती है रूह तक उतर चुका है मन धरती खुश भाव झोंका प्रदेश निहारती विचरने पुकारती मुरझाती रूह को मानो नवजीवन मिलता है फिर दर्द पुराना नई महक लेकर खिलता है कौन है क्यू है किसलिए है रूह आत्मा

Hindi रूह पुकारती है Poems