आसमां से उतर पनघट में चांदनी देर रात नहाती है। आसमां से उतर पनघट में चांदनी देर रात नहाती है।
उसने मुझे आज एक ताना मार दिया दिल को मेरे आज हरा दिया। उसने मुझे आज एक ताना मार दिया दिल को मेरे आज हरा दिया।
पर अपनी धरती पुकारती थी कुछ करेंगे हम, ये निहारती थी पर अपनी धरती पुकारती थी कुछ करेंगे हम, ये निहारती थी
जात पात और धर्म बैठे तराजू की एक ओर हैं, समझ नहीं आता दूसरी ओर बैठा कौन है। जात पात और धर्म बैठे तराजू की एक ओर हैं, समझ नहीं आता दूसरी ओर बैठा कौन है।
रास्ते तलाशते हुए शरीर सिर्फ और सिर्फ सुख भापते रास्ते तलाशते हुए शरीर सिर्फ और सिर्फ सुख भापते